Saturday, January 31, 2009

बेहद झीनें होते है वो रिश्ते
जो गर्म हवा में झुलस जाते हैं

कोई बूझे इससे पहले ही वेह खुल जाते हैं
सुजाता
बड़ी हसरत से देखती है वो
नीले आसमान में उडते पंछियों को

शायद कभी उसके ख्वाहिशात को भी पंख मिल जाएँ
सुजाता
इतने दिनों तक तसवुर में देखा किये जिसे
वो सामनें आया तो पहचाना न गया

बेहद अम्ली है वो हर पल रंग बदलता है
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हर बार कहता है वो अब नहीं जायेगा
और माँ मान जाती है

माँ का दिल फरेब कहाँ समझता है

सुजाता

Friday, January 30, 2009

जमीन पर खुदा .....माँ की ही हस्ती है

माँ को मैने हमेशा
ऐसा ही देखा है
माथे पर पसीना
मुख पर तेज
दमकता है

इतनी ऊर्जा जानें कहाँ से
वेह पाती है
या की काम में डूब
अपना दर्द छिपाती है


लगता है माँ का मन आहत है
वो चुप चाप रो रही है.....
शायद दुखी मन धो रही है

भोर से रात तक वो खटती है
हर एक के लिए माँ हर रोज
कतरा कतरा मिट ती है ....

मैनें तो बस यही जाना है
जमीन पर खुदा का रूप
माँ की ही हस्ती है ...

बिन माँ के पूरा जहाँ
एक सूनी बस्ती है


सादर ,
सुजाता
बच्चों की पुकार अल्लाह के दरबार में
सबसे पहले सुनी जाती है
लगता है बाल हठ से खुदा भी घबराता है
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बारिश के बाद मिट्टी की महक
मन के कण कण में घुल जाती है

माँ की मुस्कराहट मुझे अंतस तक भिगो जाती है
सुजाता

Thursday, January 29, 2009

माँ मुझसे अक्सर रूठ जाती है
मेरी आदतों से बहुत वो घबराती है

पर अपनी हर दुआ में वो मेरा ही सुख मनाती है
सुजाता दुआ
वो अक्सर आवाज देता है मुझे पीछे से
मुड कर देखूं तो नजर नहीं आता

मेरा साया है वो हर दम मेरे पीछे छुप जाता है
सुजाता दुआ
कल रात वो लम्हा बहुत देर तक नहीं बीता
तुम्हारी महक उस लम्हें में समाई थी

यह और बात है कि हर तरफ तन्हाई थी
सुजाता दुआ