दास्ताने दिल वो सुनाता है आज
रो कर जखम सहलाता है आज
एक वकत था की दिल तोड़ने में
पल भर भी नहीं लगाता था जो
इल्जामे बेवफाई लगाता है आज
जैसे भूखा... रोटी छीन लेता है
वेह हमदम की हंसी छीन लेता था
कहता था खुद को खुदाए मुहब्बत
जमीन ऐ मुहब्बत ही चीर देता था
कौन जाने क्या चाहता था वो
जखम बना कर सहलाता था वो
खूने दिल से सींच कर जमीन
बेरुखी से कांटे उगाता था वो
सुजाता दुआ
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