मुझे बहुत सी चीजें बस यूँ ही बहुत पसंद हैं बिना किसी ख़ास वजह के ....जैसे नेस्कैफे की छोटी वाली गोल बोतल पैकिंग ..बहुत क्यूट सी लगती है ...जैसे बिना मेकअप के गहरी काली आँखें ..और रोने के बाद आंसूं से धुली आँखें कितनी प्यारी सी लगती हैं सवाल पूछती हुई सी ....और लम्बी सड़क की तस्वीर ...बहुत लम्बी सी सड़क जिसके अंत में एक मोड़ ही दिखाई देता है बस... उस मोड़ के बाद क्या है ... कुछ नजर नहीं आता ..और आसमान में बनते बादलों के चेहरे ....जैसे आसमान तरह से अपने बनते बिगड़ते moood को समझा रहा हो ..और बारिश से पहले के हलके ठन्डे मौसम में बस बिना किसी वजह के सड़क पर चुप चाप फिरना और मौसम से बिना शब्दों के भावनाओं का आदान प्रदान की देखो तुम आज खुश हो तो मैं भी खुश हूँ ...और लॉन्ग ड्राइव में किसी रोड साइड कैफ़े (ढाबे ) पर चारपाई पर बैठ कर चाय पीना और अगर वहां पुराने हिंदी गाने चल रहे हों तो बात ही क्या.....ऐसी बहुत सी बातें लिस्ट बहुत लम्बी है .......
Sunday, March 8, 2015
लास्ट ट्रैन
एक बहुत लम्बा वक्त आसपास की जिंदगी से कटकर गुजरा .सुना था अँधेरे सिखा जाते हैं पर कभी पूरी तरह समझ नहीं आया यह तथय .कितना सिखाते है यह तो कहना मुश्किल है पर समझा बहुत जाते हैं ...अपने पराये का फर्क,emotional concern की ताकत ,your value for others ,दिखावटी कंसर्न का तार तार होता हुआ रूप और रियल कंसर्न का भीगा सम्मोहित नतमस्तक कर देने वाला रूप
बहुत सारी वर्चुअल और रियल तस्वीरें बदल जाती हैं और एक नया अध्याय जनम ले लेता है जिसे लिखते-पढ़ते समय आपकी दृष्टि एक्सरे मशीन हो जाती हैं और मस्तिष्क कोई दिव्य तराजू .
अस्तित्व का खुद से डायरेक्ट संवाद आपके आस पास के माया मोह जाल से आपको बहुत ऊपर उठा देता है और आहिस्ता आहिस्ता आप भीतर से पाषाण हो जाते हैं की फिर असंख्य अवांछित परिस्थितिया ऐसे ही निकल जाती हैं जैसे पत्थर के ऊपर से पानी निकलता है
करबद्ध नतमस्तक धन्यवाद उन सब लोगों ,परिस्थितयों ,नन्हे मासूम साथियों ,चीजों और उन भावनाओं का जिन्होंने एकतत्रित और संबलित होने में साथ दिया .सबसे अधिक ऋणी हूँ उस इमोशनल कंसर्न की जिसने मुझे यह एहसास दिलाया की मेरा अजीर्ण होता जा रहा अस्तित्व एक ऐसी खाई बना रहा है जिसमें बहुत से निरीह अस्तित्व दांव पर लग जाएंगे .इसी भावना ने इतना सम्बल दे दिया की उस दिव्य शक्ति के आधे लिखे फैसले से भिड़ गयी मैं .और उसे अपनी कलम रोकनी पडी...पता नहीं कब तक रुकी रहेगी उसकी कलम पर जितना भी वक्त है उसमें बहुत से अधूरे काम पूरे करने है और त्वरित अंदाज में क्यूंकि हो सकता है यह इस स्टेशन से चलने वाली लास्ट ट्रैन हो .
Saturday, October 11, 2014
परिस्थितियाँ हमेशा मनलायक हो ऐसा कभी नहीं होता ज्यादातर तो उन्हें विपरीत ही पाया जाता है पर ऐसे में ना तो प्रयास रुकने चाहिए न सब्र छूटना चाहिए क्यूंकि जब हम निरंतर संघर्ष रत रहते हैं और छोटी छोटी उपलब्धियां अपने खाते में जोडते जाते हैं तो एक वक्त ऐसा आता है जब हम इस काबिल हो जाते हैं की हम खुद favourable situations ko generate करने योग्य हो जाते हैं
— feeling determined.
Sujata Arora Dua shared her status update — with Chetan Dua.
Kisee bhee bhavna ko sheersh tak anubhav karna aur phir jaldee hee usey vismrit kar dena.... shaayak bhee hai aur baadhak bhee kyunki ek samay aataa hai jab inhee yaadon ke taane baane main se hee kuch jeewit palon ko chun kar jeetey aur jeewan ko toultey hain ham. . par tab dhundlee vismrit yaadon ke sirey sahee sahee pakad main nahin aatey tab badee koft hotee hai....
Subscribe to:
Posts (Atom)
