Thursday, February 5, 2009

सिंदूरी शाम का रंग चहेरे पर उतर आया था
जब मेरा साया उन्हें हौले से छु आया था

कहा था फिर दमकते गालों ने कुछ धीमे से
सुन जिसे मेरा रोम- रोम सिहर आया था

कर के मासूम इशारा जानें कहाँ पे छिप गए
इन्तेजार में दिल मेरा हलक में उतर आया था

अब तो हर पल का बीतना मुश्किल हो गया
कब जिन्दगी हो जाती सजा पता हो आया था

न तो मिलते हैं न कोई झलक ही पाता हूँ
मायनें इश्क है क्या अब समझ आया था
सुजाता

Wednesday, February 4, 2009

जिनके खून से रंगी हैं सरहदें देश की
उन शहीदों के घर में फाके होते हैं
एहसान फरामोश हैं हम जान के बदले में फाके देते हैं

Saturday, January 31, 2009

बेहद झीनें होते है वो रिश्ते
जो गर्म हवा में झुलस जाते हैं

कोई बूझे इससे पहले ही वेह खुल जाते हैं
सुजाता
बड़ी हसरत से देखती है वो
नीले आसमान में उडते पंछियों को

शायद कभी उसके ख्वाहिशात को भी पंख मिल जाएँ
सुजाता
इतने दिनों तक तसवुर में देखा किये जिसे
वो सामनें आया तो पहचाना न गया

बेहद अम्ली है वो हर पल रंग बदलता है
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हर बार कहता है वो अब नहीं जायेगा
और माँ मान जाती है

माँ का दिल फरेब कहाँ समझता है

सुजाता

Friday, January 30, 2009

जमीन पर खुदा .....माँ की ही हस्ती है

माँ को मैने हमेशा
ऐसा ही देखा है
माथे पर पसीना
मुख पर तेज
दमकता है

इतनी ऊर्जा जानें कहाँ से
वेह पाती है
या की काम में डूब
अपना दर्द छिपाती है


लगता है माँ का मन आहत है
वो चुप चाप रो रही है.....
शायद दुखी मन धो रही है

भोर से रात तक वो खटती है
हर एक के लिए माँ हर रोज
कतरा कतरा मिट ती है ....

मैनें तो बस यही जाना है
जमीन पर खुदा का रूप
माँ की ही हस्ती है ...

बिन माँ के पूरा जहाँ
एक सूनी बस्ती है


सादर ,
सुजाता
बच्चों की पुकार अल्लाह के दरबार में
सबसे पहले सुनी जाती है
लगता है बाल हठ से खुदा भी घबराता है
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बारिश के बाद मिट्टी की महक
मन के कण कण में घुल जाती है

माँ की मुस्कराहट मुझे अंतस तक भिगो जाती है
सुजाता