थोडा भ्रमित दुःख को भी कर लें
आओ प्रिय आज हम गायें
कुछ पल मन का दुःख बिसराएँ
दुःख के काले बादल भी जानें
हुआ नहीं कम धेर्य बताएं
न बनो अधीर सम गगरी
भरी नहीं कि छलकत जाए
और न चंचल सम पिहू
हवा के संग गा -गा बौराए
माना कठिन समय है आखिर
बचे बहुत कम क्षण है तो क्यूँ
हम घबरा के इन्हें गंवाएं
चलो आज कुछ क्षण तो जी ले
हवा सुगन्धित तन में भर लें
जीवन को साँसों में भर कर
थोडा भ्रमित दुःख को भी कर लें ...
सादर ,
सुजाता
Wednesday, February 18, 2009
Monday, February 16, 2009
समझा न उसनें मुझ से कहा न गया
जखम दिल का कभी दिखाया न गया
महफिले चरागाँ है वो हम जानते हैं लेकिन
दिल का अँधेरा उससे मिटाया न गया
कल तक जो मिलता था रोज मुस्करा के
फटे हाली में आज 'मैं' उससे पहचाना न गया
बेहद अम्ली है वो हर पल रंग बदलता है
गोया तभी हमसे वो कभी परखा न गया
ऐ काश की समझता वो हाल- ए - दिल
कितना वीरानां है वहाँ हमसे बताया न गया
सुजाता
जखम दिल का कभी दिखाया न गया
महफिले चरागाँ है वो हम जानते हैं लेकिन
दिल का अँधेरा उससे मिटाया न गया
कल तक जो मिलता था रोज मुस्करा के
फटे हाली में आज 'मैं' उससे पहचाना न गया
बेहद अम्ली है वो हर पल रंग बदलता है
गोया तभी हमसे वो कभी परखा न गया
ऐ काश की समझता वो हाल- ए - दिल
कितना वीरानां है वहाँ हमसे बताया न गया
सुजाता
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