Thursday, November 20, 2008

सफ़र


हो सके तो कांटे भी समेट ले आँचल में
फूल बहुत दिन तक कहाँ साथ निभाता है

क्यों हर शै पर निसार हुआ जाता है दिल
मुसाफिर को रास्तों से प्यार हुआ जाता है

साथ पल दो पल का ही हुआ है हर सफ़र
वो कौन है जो मरने के बाद साथ जाता है

फिर भी कह रहा है दिल बेसबब बार बार
वीरानी ऐ सफ़र न मिले किसी को हर बार

सुजाता दुआ

Wednesday, November 19, 2008

अंजामे बेवफाई

दास्ताने दिल वो सुनाता है आज
रो कर जखम सहलाता है आज
एक वकत था की दिल तोड़ने में
पल भर भी नहीं लगाता था जो
इल्जामे बेवफाई लगाता है आज

जैसे भूखा... रोटी छीन लेता है
वेह हमदम की हंसी छीन लेता था
कहता था खुद को खुदाए मुहब्बत
जमीन ऐ मुहब्बत ही चीर देता था

कौन जाने क्या चाहता था वो
जखम बना कर सहलाता था वो
खूने दिल से सींच कर जमीन
बेरुखी से कांटे उगाता था वो

सुजाता दुआ

Tuesday, November 18, 2008


अंतिम ख्वाहिश

आज जी चाहता है कहती रहूँ
प्रेम के दरिया मैं बहती रहूँ
खुदा न करे डूब जाऊं अगर
तुम से न मिल पाऊँ अगर
प्रिय इतना तो कर देना
दिल के पिछले कमरे मैं
थोडी सी जगह देना
चुपचाप पड़ी रहूँ गी.....
जरा दरवाजेदिल खुला रखना
की नगमों की आहट सुनती रहूँ
कुछ खवाब मैं भी बुनती रहूँ
सुजाता दुआ

हमदम

हर लम्हा दे जाता है खुशबू उसकी
हर आंसू गम दे जाता है
मेरा हमदम ऐसा है यारों
हंसते हंसते आंसू दे जाता है
सुजाता दुआ

उदासी

कब छोडोगे उदासी का आँचल
की हम तो अब हार गए
चले थे कुछ दिए जलाने
की खुद ही शमा हार गए
सुजाता दुआ


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खामोशी

खामोशी कुछ नहीं कहती बस तोड़ देती है
लहरों को उठने से पहले ही मोड़ देती है
कोई क्या जाने लहरों का गम ........
जब दरिया ही साथ छोड़ देती है ....!!

सुजाता दुआ



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Monday, November 10, 2008

क्यों है अब भी आस .........


तुमने चाहा था
खोल दूँ दिल की गांठ
होंठ तो खुले पर
शब्द निकले ही नहीं

आँखों ने तो कही थी
मन की वेह बात पर
तुम समझे ही नहीं

मैंने चाहा तो था तुम
पढो दिल की किताब
उन पृष्ठों पर थे जो शब्द
तुम्हे दिखे ही नहीं

कहा था तुमने
यह है जनम भर का साथ
पर कहां था तुम्हारा हाथ
मुझे दिखा ही नहीं

मेरा हर सवाल
लोट आता खाली हाथ
फिर भी हो भ्रमित
चल रहीं हूँ साथ
क्यों है अब भी आस
मैं समझी ही नहीं

सुजाता दुआ